मैं ख्वाब हूँ
दिन ढल जाए जब मुशकिल राहों में ,
चांद सा चमकता तुमहें बुलाता,
ना रुक ना थक तू हूं तुमहॆं बताता,
मुशकिलों को पहनाया चाहतों का नकाब हूं|
हज़ारों हौंसले टूटे इन राह-ए-मुशकिलों में,
ना थक पाए सूरज आने तक मैं वो शाहदाब हूँ,
मैं रहता हूँ कहीं तेरे ही साहिलों में,
तुझे बुलाता तेरा एक ख्वाब हूँ |
एक किसान की उस मेहनत में हूं मैं
लहलहाते खेतों में अपनी दुनिया बसाता
एक सैनिक की असीम ताकत हूँ मैं
उसकी आखों के गर्व का सरताज हूँ|
हार का टूटा सा गहना भी हूँ मैं,
जीत में आंखों का चमकता रुबाब हूं|
मैं रहता हूँ कहीं तेरे ही साहिलों में,
तुझे बुलाता तेरा एक ख्वाब हूँ |
एक नन्ही सी जान का अपनी माँ को वो पहला अलफाज़ हूँ मैं,
उसकी आंखें नम कर देता|
सूरज के लम्बे तप के बाद रातों को सुकून देता,
चांद का वो मीठा महताब हूँ|
के रुक ना जाना ए पंथी,
कोइ तेरे साथ हो न हो,
तेरे हर ज़र्रे ज़र्रे के साथ,
तुझे पुकारता ,मैं,
तेरा एक ख्वाब हूँ|
ख्वाब!!
sahil...
